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माँ और बेटी की लेजबियन सेक्स कहानी

मेरा नाम निकिता है और में 20 साल की हूँ.. आज में आप सभी को अपनी एक सच्ची कहानी सुना रही हूँ। हम एक मकान में किराए से रहते है और हम तीनों एक ही डबल बेड पर साथ में सोते है और हम पिछले तीन साल से राजस्थान में ही है। एक दिन जब नेहा अपनी क्लास गयी थी और माँ नहाने गई हुई थी.. तो में रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम एक मजेदार सेक्सी कहानी पढ़ रही थी और में पढने में इतनी व्यस्त थी कि मुझे यह भी पता नहीं चला कि कब एकदम से माँ नहाकर बाहर आकर मेरे सामने खड़ी हो गई।

में तो बहुत घरबा गई और मुझे पसीना आने लगा। तभी माँ ने पूछा कि क्या हुआ? तो मैंने कहा कि कुछ नहीं। तभी माँ ने झट से मेरा फोन छीन लिया और फोन पर इस साईट की कहानी को देखकर बहुत गुस्सा हुई और उन्होंने मुझे बहुत डांटा। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर अगले दिन माँ मुझसे बहुत अच्छा व्यहवार कर रही थी और जब नेहा अपनी क्लास गई तो माँ ने पूछा कि तू कल क्या देख रही थी? तो मैंने कहा कि कुछ नहीं देख रही थी.. माँ वो मुझसे ग़लती से खुल गया था। फिर माँ ने कहा कि में सब जानती हूँ और मुझे पता है तेरी उम्र हो गई है.. लेकिन तुझे जो करना है वो में करूँगी तू बाहर किसी के साथ कुछ ऐसे वैसे सम्बन्ध नहीं बनाएगी।तभी में माँ की यह बात सुनकर बहुत चौंक गई और मैंने माँ से कहा कि ऐसा कुछ नहीं है.. जो आप सोच रही हो। तो माँ ने कहा कि फिर ठीक है.. लेकिन कुछ भी बात हो तो तू मुझे बताएगी चाहे वो बात कोई भी हो। दोस्तों मेरी माँ कभी अपनी बगल के बाल नहीं काटती.. तो मैंने एक दिन माँ से पूछा कि क्या आपको अजीब नहीं लगता? तो वो बोली कि पहले के ज़माने में भी तो लोग बाल नहीं काटते थे। फिर मैंने मजाक में माँ से पूछा कि क्या आप बगल के अलावा भी कहीं और के बाल नहीं काटती? तो माँ ने कहा कि हाँ में अपनी चूत के बाल भी कभी नहीं काटती।

तो में यह बात सुनकर पागल हो गई और मैंने धीरे से गर्दन हिलाई और थोड़ा मुस्कुराई और माँ से कहा कि क्यों नहीं काटती? माँ ने कहा कि में शादी के पहले काटती थी.. लेकिन उसके बाद नहीं काटे.. फिर में माँ की बालों से भरी चूत देखने के लिए उत्साहित थी.. लेकिन उन्हें बोलूँ कैसे? तभी एकदम से नेहा आ गई और हमारी बात बीच में ही रुक गई। उस दिन रात को हम सो रहे थे तो मैंने सफेद कलर की नाईटी पहनी थी और भूरे कलर की पेंटी पहनी हुई थी। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। में रात को हमेशा ब्रा खोलकर सोती हूँ। माँ ने भी नाईटी पहनी थी और उस पूरी रात मेरे दिमाग में माँ की झांटे ही घूम रही थी और करीब रात के दो बजे मुझे माँ की तरफ से कुछ हलचल महसूस हुई तो में माँ के और करीब हो गई तो मुझे पता चला कि माँ अपनी उंगली अपनी झांटो वाली चूत में डाल रही है। फिर में माँ के और करीब गई तो मुझे माँ के पास से बहुत अजीब सी बदबू आ रही थी.. शायद वो माँ की चूत की बदबू थी और मुझे लगा कि इससे अच्छा मौका कभी नहीं मिलेगा। तो मैंने माँ के पेट के ऊपर हाथ रख दिया। माँ की नाईटी ऊपर थी और मेरी उंगलियां माँ की झांटो को महसूस कर सकती थी। तभी माँ एकदम से रुक गई.. शायद उन्हें पता लग गया था कि में जागी हुई हूँ.. लेकिन उन्होंने कुछ हलचल नहीं की और ऐसे ही सो गई.. लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। तो मैंने अपना हाथ और नीचे सरका लिया। माँ की चूत पूरी गीली हो रही थी और माँ की चूत का पानी मेरे हाथ में आ गया और में यह महसूस करके पागल हो गई और में सो गई। जब में सुबह उठी तो माँ पहले से ही उठी हुई थी और नेहा क्लास जा चुकी थी।

तभी में सुबह बहुत डर गई कि शायद माँ को शक हो गया होगा.. लेकिन माँ ठीक ठाक व्यहवार कर रही थी.. तो माँ ने कहा कि तू नहा ले.. तो मैंने कहा कि पहले आप नहा लो.. तो माँ बाथरूम में नहाने चली गई। तभी एकदम से माँ की आवाज़ आई निकिता.. तो मैंने बाथरूम के बाहर से पूछा कि क्या हुआ? तो माँ ने कहा कि में टावल, पेंटी, ब्रा बाहर ही भूल गई हूँ। फिर मैंने माँ को उनकी काली पेंटी जिसमे चूत की जगह पर सफेद निशान थे और यह निशान चूत से निकलते हुए रस की वजह से होते है.. ब्रा और टावल देने लगी। तो माँ ने कहा कि अंदर आकर दे दे। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। बाथरूम का गेट खोलते ही बिल्कुल सामने माँ पूरी नंगी होकर थी और माँ को पूरी नंगी देखकर में पागल हो गई। मेरी माँ थोड़ी सावलीं है.. लेकिन उनकी चूत पूरी काली थी और उस पर सभी जगह बाल थे। वो बहुत कामुक लग रही थी और मैंने कभी उन्हें ऐसे नहीं देखा था। फिर माँ ने कहा कि ब्रा, पेंटी को लटका दे और टावल ऊपर रख दे.. माँ को ऐसी हालत में देखकर मेरे बूब्स कड़क हो गये और मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। तभी माँ ने मुझसे पूछा कि निकिता तुझे मेरी चूत कैसी लगी? तो मैंने शरमाकर कहा कि माँ बहुत अच्छी है। माँ ने बोला कि तू तेरी चूत तो दिखा।तभी में माँ की यह बात सुनकर बहुत शरमा गई और माँ सीधे मेरे पास आई और मेरी नाईटी ऊपर कर दी। मेरी पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी। तो माँ मेरी गीली पेंटी देखकर उस पर हाथ रगड़ने लगी और मेरी चूत में मानो आग की लहर दौड़ने लगी। फिर माँ ने मेरी गीली पेंटी उतार दी.. लेकिन मेरी चूत पर भी बहुत छोटे छोटे बाल थे और मेरी चूत सिर्फ़ छेद की जगह से काली थी और बाकी जगह गोरी थी। फिर माँ ने मेरी चूत में उंगली डाल दी..

मेरे तो जैसे होश उड़ गये और मेरी टाईट चूत में माँ की उंगली लंड से कम नहीं थी। में माँ से एकदम सट गई और हम दोनों ने एक दूसरे को किस किया। माँ की उंगली से मेरे अंदर की कामुकता जाग उठी और में भी माँ की चूत में उंगली करने लगी। मुझे उसकी खुश्बू अच्छी लग रही थी। मेरे निप्पल बिल्कुल टाईट हो गये थे और माँ के बूब्स सीधे मेरे बूब्स से लग रहे थे.. माँ के निप्पल बहुत काले थे और माँ, में दोनों पसीने में लथपत हो गये। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर माँ मुझे बाथरूम के बाहर मेरे कमरे में पलंग पर ले गई और माँ की उंगली अभी भी मेरी चूत में थी और माँ मेरे ऊपर आकर मुझे हर जगह किस कर रही थी.. मेरे होंठ पर, बूब्स पर, पेट पर, बगल सूंघ रही थी और मेरी माँ की बगल में भी बहुत बाल थे जो मुझे दिवाना कर रहे थे और में माँ की बगल चाटने लगी उनकी पूरी बगल पसीने में गीली हो चुकी थी.. लेकिन में फिर भी उन्हें चाट रही थी और माँ अब मेरी चूत पर आ गई थी और जैसे ही माँ ने मेरी चूत पर पहला किस किया तो मेरे मुहं से बहुत ज़ोर से सिसकियाँ निकली उफ्फ्फ आआहहाअ सीईई। माँ अब चूत के अंदर अपनी जीभ डाल रही थी और माँ की जीभ मेरी चूत की दीवार से रगड़ रही थी.. यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था और मुझे भी अपनी माँ की चूत चाटने की और चाहत बड़ गई। फिर माँ और में 69 पोज़िशन में आ गये और में माँ के ऊपर उनकी चूत की तरफ और माँ मेरी चूत की तरफ बड़ने लगी। माँ की चूत से मानो जैसे नदी बह रही हो। उनकी काली चूत के झांट और खुश्बू मुझे दीवाना बना रहे थे। फिर मैंने माँ की चूत पूरी चाट ली यहाँ तक माँ की झांट तक भी चाटी और हम इनमे इतना डूब गये कि हमे नेहा का ख़याल ही नहीं रहा। तभी नेहा अपनी क्लास से आ गई..

नेहा के पास रूम की एक चाबी हमेशा रहती थी। तभी नेहा ने एकदम से दरवाज़ा खोला और देखा कि में माँ की चूत और माँ मेरी चूत चाट रही है.. वो यह सब देखकर दंग रह गई।तो माँ सीधे बाथरूम में चली गई और मैंने पास में पढ़े कपड़े पहन लिए और मुझे नेहा से आंख मिलाने में शरम आ रही थी.. तभी नेहा ने गुस्से से बोला कि क्या तुझे शरम नहीं आई माँ के साथ ऐसा करते हुए? माँ अभी भी बाथरूम में ही थी और मैंने एक बहुत अच्छा बहाना सोचा और कहा कि नेहा यह माँ की मजबूरी है और तेरी वजह से माँ को पापा से दूर रहना पढ़ रहा है.. तेरी पढ़ाई के लिए माँ यहाँ पर है और उनकी भी तो कभी कभी इच्छा होती और तू तो अब बड़ी हो गई है यह सब समझती है। तभी नेहा भावुक होने लगी और उसने कहा कि मुझे माफ़ करो दीदी.. में अब समझ रही हूँ और मैंने कभी यह सोचा नहीं था। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। इतने में माँ नाईटी पहनकर बाहर आ गई और माँ शरम के मारे हमारी तरफ देख भी नहीं रही थी। फिर नेहा कहने लगी कि माँ में समझती हूँ कि आपकी भी कभी कभी इच्छा होती है आप भी एक इंसान हो और वो कहने लगी कि माँ ऐसा था तो मुझे आप पहले ही बताती.. में समझ जाती। माँ मन ही मन मुस्कुराती रही और फिर हम सभी ने साथ में खाना खाया।लेकिन नेहा वो सीन अभी भी नहीं भूली थी और उसकी भी कमसिन जवानी में शायद आग बरस रही थी और पूरा दिन ऐसे ही निकल गया। फिर उस रात को मैंने सिर्फ़ नाईटी पहनी थी.. क्योंकि मुझे पता था कि आज रात को माँ और मेरी दोनों की चूत की आग बुझानी है। तो में और माँ आज रात को नेहा के सोने का इंतज़ार कर रहे थे और नेहा के सोते ही.. माँ ने नाईटी के ऊपर से मेरे बूब्स दबाना शुरू कर दिया और में भी माँ के बूब्स दबा रही थी।

तभी माँ ने मेरे कान में कहा कि आजा बेटी में तुझे चूत का रस चखाऊँ.. तो यह सुनकर मुझसे रहा नहीं गया और में माँ की नाईटी में घुस गई और माँ की नाईटी में घुसकर मैंने माँ की चूत चाटी। करीब दस मिनट बाद माँ मेरे मुहं में झड़ गई और में पूरा रस चाट गई। फिर मैंने माँ की नाईटी को ऊपर किया और माँ का पूरा बदन चाटने लगी.. तभी एकदम से लाईट चालू हो गई देखा तो नेहा सामने खड़ी हुई थी.. नेहा ने कहा कि दीदी मेरी चूत भी गीली हो गई है। क्या में भी करूं आपके साथ? हम दोनों यह सुनकर बहुत खुश हो गये और फिर मैंने नेहा के कपड़े उतारे.. नेहा का पहले सफेद टॉप उतारा। उसने काली ब्रा पहन रखी थी और उसकी ब्रा में से उसके बूब्स बहुत अच्छे एकदम सेक्सी लग रहे थे और उसकी छाती बहुत सुंदर थी। फिर में उसकी चुचियों में घुस गई और उसकी चुचियों को मसाज करने लगी। फिर मैंने उसकी नीली पेंटी उतारी उसकी पेंटी उतारते ही उसकी पेंटी माँ सूंघने लगी। उसमे बहुत कामुक सुगंध आ रही थी। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर माँ के निप्पल बहुत टाईट हो गये थे और नेहा की चूत जैसे नई दुल्हन की तरह एकदम कसी हुई गोरी थी और में माँ की चूत भूलकर उसकी चूत चाटने लगी। फिर माँ नेहा की चूत चाट रही थी.. में माँ की और नेहा हम दोनों की चुचियां मसल रही थी। फिर मैंने माँ से कहा कि माँ मुझे आपकी गांड चाटनी है तो माँ जल्दी से घोड़ी बन गई.. लेकिन माँ की गांड पर बहुत बाल थे और माँ की गांड का छेद बहुत काला था। माँ की गांड भी काली थी.. लेकिन सुडोल थी और मैंने माँ की गांड के छेद में अपनी जीभ डाल दी। मुझे माँ की गांड ने कामुक कर दिया.. ऊपर से नेहा मेरी चूत चाटने लगी। हम सबने एक दूसरे की गांड चाटी, चूत चाटी माँ की बगल चाटी और हम पूरी रात ऐसे ही सेक्स करते रहे। उसके बाद अब हम पूरे दिनभर नंगे ही रहते है। और हम हर दिन नंगे ही सोते है । कैसी लगी हम डॉनो माँ और बेटी की लेजबियन सेक्स स्टोरी , रिप्लाइ जररूर करना , अगर कोई मेरी और माँ की चूत की चुदाई करना चाहते हैं तो अब जोड़ना Facebook.com/NikitaSharma

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