कार में आंटी ने लंड चूसा

कार में चुदाई xxx sex kahani, सेक्स कहानी 2018, चुदाई कहानी, 40 साल की आँटी की चुदाई xxx desi kahani, आँटी की चुदाई hindi sex story, सेक्स कहानी, आँटी की प्यास बुझाई xxx chudai kahani, आँटी को चोदा xxx real kahani, aunty ki chudai story, आँटी के साथ चुदाई की कहानी, आँटी के साथ सेक्स की कहानी, aunty ko choda xxx hindi story,

 मैं हिमाचल के एक सर के लिए ड्राइविंग करता था. फेक्ट्री के सामने ही उनका टाउनशिप था जहाँ उनका एक बंगला था जिसमे वो अपनी फेमली के साथ रहते थे. मैं सुबह उन्हें घर से फेक्ट्री और शाम को फेक्ट्री से घर लाता था.उस टाइम शर्दी का मौसम था. मैं डेली रूटीन से साहब को पिक और ड्राप कर रहा था. एक दिन मैं जब उनके घर पहुंचा और बेल बजाई तो सर ने आने में कुछ टाइम लगाया. सर नहीं आये लेकिन अन्दर से एक मस्त अवाई आई की आते हैं. जैसे ही दरवाजा खुला मेरे सामने एक ३२ साल के करीब की मस्त आंटी खड़ी थी. प्लेन ब्ल्यू साड़ी में वो बड़ी मस्त लग रही थी. मैं २ मिनिट्स उन्हें देखता ही रह गया. उन्होंने भी मुझे घूरते हुए नोट किया. उसने मुझे कहा, रुको साहब आते हैं कुछ देर में. मैंने कहा ठीक हैं मैं गाडी में वेट करता हूँ. तो उसने कहा, अन्दर आ जाओ बहार ठंडी हैं.

मैं आंटी को देखने लगा उसकी नजर मेरे लोडे की तरफ थी जैसे की वो उसे साइज़ अप कर रही हो. मैं सोफे पर बैठा और वो मेरे लिए पानी ले के आई. मैं पानी पी रहा था और वो मुझे ही देख रही थी.२ मिनिट में साहब ऊपर से सीडियां उतरते हुए निचे आये. आप ये कहानी रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है।आंटी को देख के बोले, सुधा क्या तुम मार्केट हो आई कल?आंटी ने थोड़े दबे आवाज में कहा, जी नहीं टाउनशिप के बहार एक ही रिक्शेवाला होता हैं और वो कल नहीं आया था.ओके, क्या मैं कार भेजूं ऑफिस जाने के बाद.जी हाँ, वो सही रहेगा.साहब ने मेरी और देख के कहा, देखो सुन्दर भाई आप मुझे ड्राप कर के मेमसाब को मार्केट ले जाना जरा.ठीक हैं साहब जी.साहब को फेक्ट्री में ड्राप कर के मैं आधे घंटे में वापस घर आया. घर की घंटी २-३ बार बजाई लेकिन कोई जवाब नहीं आया. मैंने सोचा की आंटी कही चली गयी होंगी. यह सोच के मैं वापस कार की तरफ जा ही रहा था की दरवाजा खुला. सामने आंटी खड़ी थी जो अभी बाथरूम से नाहा के आई थी. उसके बदन पर एक हलके रंग की साडी थी जिसके अन्दर की काली ब्रा साफ़ दिख रही थी. उसके कपड़ो में नमी थी इसलिए अन्दर के अंतरवस्त्र मैं देख सकता था. उन्होंने मुझे कहा, अन्दर आओ.वो आगे बढ़ी और मैं उसके पीछे. उनकी गांड के ऊपर भी काली पट्टी दिख रही थी पेंटी की. मैं उसे देखता ही रहा. मेरे लोडे में जान आ गई थी और मैं इस हिमाचली सेब को चखने के लिए बेताब था. आंटी ने मुझे सोफे पर बैठने के लिए कहा और वो बाथरूम की और बढ़ गई.५ मिनिट में जब वो बहार आई तो उसने अपना चहरा मेकअप में लपेड़ा हुआ था. आँखों पर ब्लेक फ्रेम के चश्मे थे और सोके पास की मेज से पर्स लेते हुए वो बोली, चलो चलते हैं.वो फिर मेरे आगे थी और मैं उसकी गांड को देख रहा था. कुल्हें मटकाते हुए वो चल रही थी और मेरा लोडा खड़ा हो रहा था. उसने मुड़ के देखा और मुझे अपनी गांड देखते हुए पाया.वो हंसी और बोली, जल्दी चलो बाबा.

मैं भी अपने होंठो में हँसता हुआ बहार निकला. उसने दरवाजे पर लोक किया और गाडी की और बढ़ी. मुझे लगा था की वो पीछे की सिट में बैठेंगी लेकिन उसने तो आगे का दरवाजा खोला. वो सिट पर बैठी और मैंने गाडी स्टार्ट की.मार्केट जाते जाते उसने मुझे अपने बारे में बताया और मेरी भी हिस्ट्री खोली. उसने यह भी पूछा की मैं कुंवारा था या शादीसुदा. मार्केट से कुछ दिन की सब्जी लेने के बाद वो वापस आई. मैं गाडी के पास खड़ा हुआ मोबाइल में गेम खेल रहा था. आप ये कहानी रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है।उसके आते ही मैंने गाडी का पीछे का दरवाजा खोला. आंटी ने सारा सामान रखा और फिर आगे का दरवाजा खोल के बैठ गई.गाडी अपनी मंद गति से चल रही थी तभी एआंटी ने मुझे कहा, क्या तुम गाड़ी चलाना सिखाते भी हो?किसे सीखना हैं?मैं ही सोच रही थी सिखने के लिए.जी हां, आप को मैं सिखा सकता हूँ मेडम.वो हंसी और चुदासी नजरों से मुझे ऊपर से निचे तक देखा. उसके मन में भी कीड़ा था जो मैं उसकी आँखे देख के बता सकता था. गाडी घर से अभी कुछ दूर थी की आंटी बोली, क्या आज से ही स्टार्ट कर सकते हैं हम गाडी सीखना?क्यूँ नहीं, वैसे भी मेरी कोई और सवारी नहीं हैं अभी यहाँ से जाने के बाद.हम लोग घर पहुंचे और आंटी ने सब्जी के ठेले घर में रख दिए. फिर मुझे पानी देने के बाद वो मेरी और देखने लगी. वो शायद बहार जाने के लिए बेताब थी.मैंने कहा, चले मेडम?हाँ चलो.वो गाडी में बैठी और मैंने गाडी को क्रिकेट ग्राउंड की और दौड़ा दिया. दोपहर का वक्त हो चला था इसलिए ग्राउंड पूरा खाली था. एक कौने में सिर्फ बंजारों के कुछ तम्बू थे जिसके बहार दो-तिन औरतें खाना पका रही थी. गाडी को साइड में लगा के मैंने आंटी को क्लच, एक्सलेरेटर, ब्रेक, वगेरह का कुछ ज्ञान दिया तो उसने कहा की उसने आलरेडी क्लास किये थे ड्राइविंग के लिए लेकिन प्रेक्टिस नहीं हो पाई इसलिए वो कोंफिडेंट नहीं हैं चलाने के लिए.मैंने कहा, ये तो अच्छा हैं की आप को यह सब पता हैं, कोंफीडेंट आज हो जाएगा.आंटी ने गाडी स्टार्ट की और मैं उसके बगल में बैठा. जैसे ही उसने फर्स्ट गियर में गाडी को उड़ाया मैं जान गया की वो क्लच जल्दी छोड़ देती हैं. गाडी एक झटका खा के बंध हो गई. मैंने आंटी से कहा की आराम से आप क्लच छोड़ें.

आंटी ने फिर से ट्राय किया लेकिन वो वही झटके से गाडी को बंध करने में फिर से सफल रही.मैंने कहा, आइये मैं आप को दिखाता हूँ.इतना कह के मैंने गियर के डंडे की उस साइड पर एक पाँव रखा और क्लच को दबा के उसे बताया की कैसे छोड़ना हैं. आंटी ने कहा की आप पाँव रहने दो यही, मैं गाडी स्टार्ट करती हूँ.उसने गाडी स्टार्ट की और पहले गियर में मैंने डाली. उसने एक्स्लेरेटर दबाया और मैं उसके हिसाब से क्लच छोड़ता गया. गाडी रुकी नहीं इसलिए आंटी खुश हो गई. और इस खिंचातानी में पता नहीं कब उसका एक हाथ मेरी जांघ पर आ गया. आप ये कहानी रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है।मुझे भी पहले अहसास नहीं हुआ लेकिन जब नजर पड़ी तो मुझे अच्छा लगने लगा. आंटी गाडी सिखने की नौटंकी करते हुए मेरी जांघ के ऊपर हाथ को सहला रही थी. मेरा तो लंड खड़ा हो गया उसके ऐसा करने से.और आंटी ने हिम्मत कर के अपना हाथ आगे बढ़ाया और मेरे लंड पर दस्तक दे दी. मेरा टाईट लंड छूते ही उसका कडापन उसे भी मदहोश कर गया होगा. उसने मेरी और देखा और मैं हंस पड़ा.आंटी ने गाडी को साइड में ब्रेक लगाईं और मेरी जांघ के ऊपर हाथ फेरने लगी. मैं भी खुद को रोक नहीं पाया और मैंने आंटी के बूब्स पर अपना हाथ रख दिया. आंटी ने कार की सभी खिड़की से बहार देखा. इर्दगिर्द में कोई नहीं था जहां तक नजर जाती थी. आंटी ने मेरी पेंट की जिप खोल दी और लौड़े को बहार निकाला. खड़ा लंड देख के उसकी आँखों में चमक आ गई और वो मेरे लौड़े को अपने हाथ में पकड के हिलाने लगी. मेरे तो होश उड़े हुए थे. मैं जोर जोर से आंटी के बूब्स को दबाता जा रहा था. आंटी मेरे लंड को बड़े ही प्यार से सहलाती जा रही थी.और उसके बाद आंटी ने जो किया वो तो मैंने सोचा ही नहीं था. आंटी ने अपना सर निचे किया और मेरे लौड़े को अपने मुहं में भर लिया. वाऊ, आंटी के मुहं की चिकनाहट बड़ी ही सेक्सी थी जिस से मुझे दुगुना मजा आने लगा.

आंटी अपने मुहं को आगे पीछे करने लगी और जोर जोर से लौड़े को मुहं में आगे पीछे करती रही. मैंने अपना हाथ आंटी के माथे पर रखा और उसे लौड़े पर दबा दिया. और निचे से मैं अपनी गांड उठा के आंटी के मुहं में लंड को धकेलता रहा.२ मिनिट ऐसे ही लंड चूसने के बाद आंटी के मुहं में ही मैंने अपने वीर्य का फव्वारा छोड़ दिया. आंटी आराम से वीर्य पी गई और उसने लौड़े को चाट के साफ़ कर दिया. आंटी ने मुहं से लौड़े को सब तरफ से साफ़ किया और उठ गई. आंटी ने कहा, चलो घर चलते हैं, सब कुछ यहाँ नहीं कर सकते…!गाडी चलाते चलाते मैं आंटी की चूत के सपने देख रहा था….!कैसी लगी आंटी की सेक्स स्टोरी , रिप्लाइ जररूर करना , अगर कोई आंटी की चूत की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे अब जोड़ना Facebook.com/Shadhona

1 comments:

Indian sex story,indian xxx story,hindi porn story,hindi xxx kahani,hindi adult story,

Delicious Digg Facebook Favorites More Stumbleupon Twitter